खेती

Source: https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti

Archived: 2026-04-23 17:34

खेती
About the Journal
भाकृअनुप की इस लोकप्रिय हिंदी मासिक पत्रिका का प्रकाशन 1948 में शुरू किया गया था और तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। इसमें आईसीएआर अनुसंधान नेटवर्क में काम कर रहे प्रख्यात वैज्ञानिकों के लेख शामिल किए जाते हैं। इसमें समन्वित कृषि, मात्स्यिकी, कृषि वानिकी, मधुमक्खीपालन, फसलें, पशुपालन, फसल प्रणाली, व्यावसायिक खेती, फसल स्वास्थ्य, नवीन कृषि प्रौद्योगिकियों, कृषि इंजीनियरिंग, मृदा सुधार आदि पर आधारित लेख प्रकाशित किये जाते हैं। ‘अगले माह खेतों में‘ शीर्षक से एक नियमित कॉलम प्रकाशित किया जा रहा है जो किसानेां के लिए आगामी कृषि गतिविधियों के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। ‘कृषि खबरें, देश-विदेश की नामक कॉलम कृषि में उपलब्धियों से संबंधित नवीनतम समाचारों पर आधारित है। इसी प्रकार ‘सामयिक‘ नामक एक अन्य स्तंभ है जिसमें कृषि के ज्वलंत विषयों से संबंधित संक्षिप्त जानकारी प्रदान की जाती है। प्रत्येक अंक में औसतन मुद्रित 80 पूर्ण रंगीन पृष्ठ होते हैं। कृषक समुदाय, विस्तार कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील किसानों और कृषि छात्रों के लिए उपयोगी विषयों पर आधारित ज्ञानवर्धक जानकारियां इसमें प्रकाशित की जाती है। वर्ष में 3 से 4 विशिष्ट विषयों पर आधारित विशेषांक प्रकाशित किए जा रहे हैं।
Current Issue
Vol. 78 No. 12 (2026): अप्रैल 2026
खेती पत्रिका का अप्रैल 2026 अंक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं व्यवहारिक जानकारी से परिपूर्ण है। इस अंक में आधुनिक कृषि तकनीकों, संसाधन संरक्षण, पशुपालन, पोषण सुरक्षा तथा कृषि उद्यमिता से जुड़े विविध महत्वपूर्ण विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
अंक में
एकल गाय विधि द्वारा गन्ना की खेती से लाभकारी उत्पादन
,
वर्षापोषित एवं क्षारीय मृदा में चारा उत्पादन
, तथा
कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मृदा परीक्षण की भूमिका
जैसे लेख किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके साथ ही
पोषणयुक्त लाल धान  उत्पादन
की सफलता की कहानी पोषण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त
जीरो बजट प्राकृतिक खेती का भविष्य
,
दलहन भंडारण में पल्स बीटल का प्रबंधन
, तथा
भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की आधुनिक खेती में आवश्यकता
जैसे विषय किसानों को नवीन तकनीकी दृष्टिकोण से अवगत करवाते हैं।
दंत-परीक्षण द्वारा गोवंश की आयु का आकलन
और
सटीक कृषि के फायदे
पशुपालन एवं प्रिसीजन फार्मिंग की उपयोगिता को रेखांकित करते हैं।
इस अंक में विशेष रूप से जोड़ा गया लेख
कृषि उष्मायन केंद्रों की भूमिका
कृषि आधारित स्टार्टअप, नवाचार एवं युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में उनकी महत्ता को स्पष्ट करता है।
समग्र रूप से यह अंक वैज्ञानिक जानकारी, नवीन तकनीकों एवं सफल अनुभवों के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि और टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
Published:
2026-04-13
Articles
एकल गांठ विधि द्वारा गन्ने की सफल खेती
नवनीत कुमार
7

/
22
pdf (Hindi)
लवणीय, क्षारीय एवं अम्लीय मृदा में हरा चारा उत्पादन
ब्रजेश कुमार
4

/
11
pdf (Hindi)
मृदा परीक्षण से बढ़ाएं उत्पादकता
ज्योति बाला
13

/
27
pdf (Hindi)
लाभकारी पौष्टिक किस्म वी.एल. धान-69
एन.के. सिंह, राज कुमार, कमल कुमार पाण्डे, हरीश चंद जोशी, अमित कुमार , जे. पी. आदित्य
5

/
15
pdf (Hindi)
जीरो बजट आधारित प्राकृतिक खेती
प्रदीप कुमार, प्रणवा पांडेय
8

/
21
pdf (Hindi)
दलहन भंडारण में पल्स भृंग का प्रबंधन
उत्कर्ष उपाध्याय, ब्रजराज शरण तिवारी, कु. जागृति मिश्रा, मोहित तिवारी; जितेन्द्र ओझा
8

/
8
pdf (Hindi)
कृषि में भूस्थानिक प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता
मुजाहिदा सैयद
5

/
7
pdf (Hindi)
दंत परीक्षण से गोवंश की आयु का आकलन
अजयवीर सिंह सिरोही, मेघा पांडे, सुमित महाजन
3

/
10
pdf (Hindi)
कृषि ऊष्मायन केन्द्रों की भूमिका
रिन्नी सिंह, हिमांशु तिवारी
12

/
15
pdf (Hindi)
सटीक कृषि है फायदेमंद
राहुल रंजन, जगन्नाथ पाठक, अनुराग सिंह सुमन, अनुराग राजपूत, साक्षी मिश्रा
6

/
28
pdf (Hindi)
View All Issues
Make a Submission
Make a Submission
Information
For Readers
For Authors
For Librarians
सर्वाधिक पढ़े गए (30 दिन)
प्राकृतिक खेती : सतत कृषि का आधार
76
खीस का महत्व
67
कैसे लें मूंग की भरपूर पैदावार
59
कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका
54
अरहर उत्पादन की उन्नत विधि
50
Indian Council of Agricultural Research
Krishi Bhavan, Dr. Rajendra Prasad Road, New Delhi-110001.
Configured & Maintained by
ICAR-DKMA