दस्तावेज़ विकास | एईआरबी
Source: http://www.aerb.gov.in/hindi/reg-proc/document-dev-hi
Archived: 2026-04-23 17:11
दस्तावेज़ विकास | एईआरबी
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एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनीकारक विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो ।
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नियामक संरक्षा प्रलेखों का विकास
सुविधाओं व प्रयोक्ताओं के लिये नियामक संरक्षा प्रलेखों के रूप में एईआरबी संरक्षा आवश्यकताओं व मार्गदर्शन का विकास व निर्धारण करता है। ये नियामक संरक्षा प्रलेख परमाणु ऊर्जा (विकिरण संरक्षण) नियम, 2004 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किये जाते हैं। इन प्रलेखों का विकास, नियमन के अंतर्गत आने वाली सभी नाभिकीय व विकिरण सुविधाओं तथा गतिविधियों पर क्रमिक विधि से लागू होने की दृष्टि से किया जाता है।
नियामक संरक्षा प्रलेखों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है :
संरक्षा संहितायें एवं मानक
संरक्षा संहितायें, पर्याप्त संरक्षा सुनिश्चित करने के लिये उद्देश्य स्थापित करती है तथा उसके लिये पूरी की जाने वाली आवश्यकताओं का निर्धारण करती हैं। सभी संरक्षा संहिताओं के मसौदे जनता की टिप्पणियों के लिये एईआरबी की वेबसाइट पर प्रदर्शित किये जाते हैं तथा प्राप्त टिप्पणियों पर विचार करने के बाद ही उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है।
संरक्षा निर्देशिकायें
जिन प्रक्रियाओं या अनुप्रयोगों के लिये संरक्षा संहिता जारी नहीं की गयी है, उनकी संरक्षा आवश्यकताओं व मार्गदर्शन प्रदान करने वाला प्रलेख।
संरक्षा संदर्शिकायें
ये प्रलेख संरक्षा संहिताओं में निर्दिष्ट विभिन्न आवश्यकताओं की विस्तृत व्याख्या करती है तथा उन्हें लागू करने की विधियों की संस्तुति करती हैं।
संरक्षा नियमावलियां
नये नियामक संरक्षा प्रलेखों का विकास या पूर्व प्रलेखों का संशोधन, तकनीकी प्रगति, नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय स्थिति, अनुसंधान व विकास कार्यों, प्रचालन अनुभव से प्राप्त सबकों तथा संस्थान में उपलब्ध जानकारी के आधार पर किया जाता है। एईआरबी ने संरक्षा प्रलेखों के विकास, समीक्षा, संशोधन व प्रकाशन की एक प्रक्रिया स्थापित की है। इस कार्य में विशेषज्ञों (एईआरबी तथा बाहरी संस्थानों से लिये गये) तथा संबंधित रूचिधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।। इन नियामक संरक्षा प्रलेखों का अनुपालन ही सुविधाओं व गतिविधियों के नियमन का आधार है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत में आयनकारी विकिरण व नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग जनता के स्वास्थ्य व पर्यावरण पर कोई अवांछित प्रभाव न डाले।
रूचिधारकों को प्रलेख विकास की प्रक्रिया में शामिल करने की एईआरबी प्रतिबद्धता के अनुसार इन प्रलेखों पर टिप्पणियां व सुझाव आमंत्रित किये जाते हैं। ये सुझाव document[at]aerb[dot]gov[dot]in वेबसाइट पर किसी भी समय प्रेषित किये जा सकते हैं। एईआरबी इन सुझावों का प्रयोग प्रलेखों के आगामी संशोधन में करता है।
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