जन जागरुकता | एईआरबी
Source: http://www.aerb.gov.in/index.php/public-awareness-hi
Archived: 2026-04-23 17:11
जन जागरुकता | एईआरबी
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एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनीकारक विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो ।
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जन जागरुकता
ज्ञान क्षेत्र
छात्र
प्रोफेशनल
अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियाँ
परमाणु सुरक्षा पर कन्वेंशन
संरक्षा अनुसंधान कार्यक्रम
सेमिनार के लिए फंडिंग
पारदर्शिता-स्पष्ट सरकार
सूचना का अधिकार
सतर्कता
लोक शिकायत
ई-लोरा
ई-लोरा दिशा निर्देश
सार्वजनिक जागरूकता
शांतिपूर्ण व लाभकारी उपयोगों के लिये परमाणु ऊर्जा व विकिरण के संरक्षित उपयोग के बारे में जनता का दृष्टिकोण बदलने के लिये उन्हें सही जानकारी देना आवश्यक है। परमाणु ऊर्जा विभाग, प्रकाशन एवं इलेक्ट्रानिक माध्यमों के लिये ऐसा कार्यक्रम चला रहा है। परंतु देश में नाभिकीय एवं विकिरण सुविधाओं के संरक्षित उपयोग में एईआरबी की भूमिका के बारे में जनता को जानकारी देने के लिये सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा अन्य संस्थाओं के ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने का निर्णय लिया गया है। साथ ही एईआरबी की वेबसाइट पर जनता के लिये यह जानकारी उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है कि जनता व पर्यावरण को बिना कोई हानि पहुंचाने, परमाणु ऊर्जा एवं विकिरण का सुरक्षित प्रयोग कैसे सुनिश्चित किया जाता है।
विकिरण के संरक्षित उपयोगका अर्थ समझने के लिये पहले यह जानना आवश्यक है कि विकिरण क्या है ?
विकिरण क्या है ?
विकिरण गतिशील ऊर्जा है। विकिरण का सरलतम तथा सुपरिचित उदाहरण है – सूर्य अथवा किसी जलते हुए पदार्थ से निकलता प्रकाश। हम सभी यह बात जानते हैं कि जब इस प्रकाश की तीव्रता अधिक (जैसे गर्मी के मौसम में) होती है तो यह हानिकारक हो सकता है। यदि यह एक सीमा से कम हो तो यह संतोषप्रद व अहानिकर होता है। सर्दी के मौसम में जब सूर्य के प्रकाश (विकिरण) की तीव्रता कम होती है तो हम स्वयं को गर्म रखने के लिये आग का प्रयोग करते हैं। अत: विकिरण एक औषधि के समान है जो ठीक मात्रा में लेने पर लाभ की तुलना में कम हानिकारक होती है परंतु अत्यधिक मात्रा में लेने पर मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
विकिरण आयन उत्पन्न करने वाला या आयन न उत्पन्न करने वाला हो सकता है। आयनन उत्पन्न करने वाला विकिरण वह है जिसमें परमाणु से इलेक्ट्रान को अलग करने (आयनीकरण) के लिये पर्याप्त ऊर्जा नहीं होती (जैसे रेडियोतरंगे, सूक्ष्म तरंगे (microwaves), अवरक्त विकिरण, दृष्य प्रकाश, लेज़र, पराबैंगनी प्रकाश, रैडार आदि) जबकी आयनकारी विकिरण में परमाणु से इलेक्ट्रान को अलग करने के लिये (आयनीकरण) पर्याप्त ऊर्जा होती है (जैसे अल्फा कण, बीटा कण, न्यूट्रान, गामा किरणें, एक्स-रे किरणों आदि)। विद्युत चुंबकीय विकिरण के लक्षण व प्रकार नीचे के चित्र में दिये गये हैं।
पृष्ठभूमिक विकिरण क्या है तथा विकिरण के अनुप्रयोग से व्यक्ति को कितना विकिरण मिल सकता है ?
हम पृथ्वी की सतह पर रहते हैं तथा व्यवहारिक रूप से विकिरण के समुद्र में हैं। ये विकिरण हमें अंतरिक्ष से (हमारे वायुमंडल से छन कर) या धरती के पदार्थों या भवनों, दीवारों और संरचनाओं से (जिनमें काफी मात्रा में प्राकृतिक रेडियोसक्रिय पदार्थ होते हैं) मिलता है। यदि हम बिना सुरक्षा के हवा में बहुत ऊपर चले जायें तो हमें ब्रह्मांड किरणों के उसी स्रोत से धरती की तुलना में अधिक विकिरण मिलेगा। यदि हम ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां प्राकृतिक रेडियोसक्रिय पदार्थ अधिक मात्रा में है (कुछ तटीय क्षेत्रों में तटीय रेत या खुली खानें) तो हमें अन्य स्थानों की अपेक्षा वहां पर अधिक पृष्ठभूमिक विकिरण मिलेगा। सामान्य पृष्ठभूमिक विकिरण के कारण हमारे शरीर में निक्षेपित ऊर्जा लगभग 2.4 mSv/वर्ष (2400 mSv/वर्ष) [चित्र देखें]। यदि हम इसकी तुलना नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र की अपवर्जन सीमा पर रिएक्टर से 1 – 1.6 किमी दूर) मिलने वाले विकिरण से करें तो यह केवल 0.015 mSv/वर्ष (15 Sv/वर्ष) [चित्र देखें]। यह मात्रा चित्र में दिखाई गयी किसी भी अन्य गतिविधि की तुलना में बहुत कम है। यहां यह बताना उचित होगा कि ----------
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संरक्षा सुनिश्चित करने में एईआरबी की भूमिका ?
रेडियोसक्रिय पदार्थों के प्रयोग तथा ऊर्जा उत्पादन, निदान, चिकित्सा तथा उद्योगों जैसे शांतिपूर्ण उपयोगों वाली सुविधाओं में संरक्षा सुनिश्चित करने के लिये, एईआरबी को लागू संरक्षा नियमों के अनुपालन की कठोर जांच के बाद उनके लायसेंसीकरण एवं नियमन के लिये संपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। संरक्षा नियमन में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विकास के आधार पर नियमों के विकास व संशोधन का उत्तरदायित्व एईआरबी का है।
एईआरबी के अधिकार क्षेत्र में क्या आता है ?
एईआरबी का संबंध नाभिकीय स्रोतों (नाभिकीय रिएक्टरों, स्थल पर भंडारित भुक्तशेष ईंधन, अपशिष्ट निपटान सुविधायें एवं परिवहन सहित अन्य गतिविधियां) से उत्सर्जित आयनकारी विकिरण, विकिरण अनुप्रयोग (रेडियोआइसोटोपों के प्रयोग से संबंधित) तथा एक्स-रे मशीनों से है। अन्य स्रोतों के विकिरण जैसे मोबाइल टावर, पराध्वनिक/सोनोग्राफी मशीने, एमआरआई उपकरण को आयनकारी विकिरण नहीं माना जाता। चूंकि एईआरबी केवल आयनकारी विकिरण के सुरक्षित उपयोग के नियमन के लिये उत्तरदायी है अत: एमआरआई, पराध्वनिक या सोनोग्राफी मशीनें एईआरबी के नियमन के अंतर्गत नहीं आती।
नीचे दिये गये चिकित्सा नैदानिक उपकरण/सुविधायें तथा इनसे संबंधित प्रचालक/कार्मिक एईआरबी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती है :
एक्स-रे उपकरण तथा सुविधायें
कैथ लैब व सीटी स्कैन मशीनें व सुविधायें
सी-आर्म तथा स्तन-चित्रण मशीनें व सुविधायें
संतोषप्रद संरक्षा अनुपालन की जांच के बाद ये मशीनें एईआरबी द्वारा टाईप अनुमोदन के योग्य है। ऐसी टाईप अनुमोदित मशीनों वाली सुविधायें, संतोषप्रद विन्यास संरक्षा तथा प्रचालन संरक्षा की जांच के बाद विन्यास अनुमोदन तथा पंजीकरण/लायसेंसीकरण के योग्य है।
जो कार्मिक इन मशीनों/सुविधाओं का प्रचालन करते हैं उन्हें विकिरण कार्मिक माना जाता है। यद्यपि इन कार्मिकों के काम करने के घंटों/दिनों को निश्चित करने में एईआरबी की कोई भूमिका नहीं है परंतु उन कार्मिकों के लिये निम्न सीमायें निर्धारित की गयी हैं :
5 वर्षों के ब्लाक में कुल संचित डोज़ 100 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
5 वर्षों के ब्लाक के किसी कैलेंडर वर्ष में प्रभावी डोज़ 30 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
किसी भी कैलेंडर वर्ष में आंख के लेंस को प्राप्त समतुल्य डोज़ 150 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
किसी भी कैलेंडर वर्ष में त्वचा, हाथों व पैरों को प्राप्त समतुल्य डोज़ 500 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
Iप्रजनन आयु वर्ग की किसी महिला के केस में गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद भ्रूण की रक्षा के लिये महिला के पेट की सतह (धड़ का निचला हिस्सा) पर गर्भावस्था की शेष अवधि के लिये 1 mSv समतुल्य डोज़ सीमा लागू की जानी चाहिये।
नैदानिक रेडियोलाजी विभाग द्वारा एक्स-रे उपकरणों का लायसेंस प्राप्त करने के लिये आवश्यकताओं का विवरण एईआरबी संरक्षा संहिता
“चिकित्सीय नैदानिक एक्स-रे उपकरणों के निर्माण, आपूर्ति एवं प्रयोग में विकिरण संरक्षा [एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-3 (संशोधन- 2), 2016]”
तथा एईआरबी संरक्षा संदर्शिका “विकिरण सुविधाओं की अनुमति प्रक्रिया (एईआरबी/आरएफ/एसजी/जी-3)” में दिया गया है। उपर्युक्त संरक्षा संहिता चिकित्सीय नैदानिक उपयोग के एक्स-रे उपकरणों की डिज़ाइन, निर्माण, स्थापना, प्रचालन तथा विकमीशनन में विकिरण संरक्षा के नियंत्रण के उद्देश्य से जारी की गयी है।
चिकित्सीय नैदानिक उपकरणों/सुविधा से संबंधित नियामक आवश्यकताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिये “बहुधा पूछे जाने वाले पश्न” देखें। इस लेख में विकिरण कार्मिकों के वैयक्तिक मानीटरन, मानीटरन युक्तियों तथा उनके प्रकार व उपलब्धता की जानकारी दी गयी है।
किसी संस्थान/अस्पताल के रेडियोलाजिकल विभाग की नाभिकीय औषध/रेडियोऔषध तथा रेडियोथेरेपी सुविधाओं तथा अनेक कार्मिक भी एईआरबी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। नाभिकीय औषध सुविधाओं के लिये एईआरबी ने नियमन प्रक्रिया (संरक्षा संहितायें व संदर्शिकायें) स्थापित की है जो रेडियोथेरेपी स्रोतों, उपकरणों व संस्थापनों की डिज़ाइन, स्थापना व प्रचालन तथा उससे संबंधित नाभिकीय औषध उपयोग के रेडियोसक्रिय पदार्थों के प्रहस्तन के दिशानिर्देश निर्धारित करती है। रेडियोथेरेपी सुविधाओं के प्रचालन का लायसेंस जारी करने के लिये विशिष्ट आवश्यकतायें भी स्पष्टत: निर्धारित हैं तथा उनका उपयोग अनुपालन की जांच के लिये किया जाता है।
संबंधित योजक :
संरक्षा संहिता “नाभिकीय औषध सुविधायें” एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-2 (संशोधन-2), 2011
संरक्षा संदर्शिका “विकिरण सुविधाओं की अनुमति प्रक्रिया” एईआरबी/आरएफ/एसजी/जी-3
Sसंरक्षा संहिता “विकिरण थेरेपी स्रोत, उपकरण तथा संस्थापन” एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-1 (संशोधन-1), 2011
नाभिकीय संरक्षा एवं विकिरण संरक्षा के बारे में जानकारी को जनता तक कैसे प्रेषित किया जाता है ?
नैदानिक व चिकित्सीय विकिरण उपयोगों में कार्यरत डाक्टरों तथा अन्य विकिरण संरक्षा व्यवसायिकों को वर्तमान/संशोधित आवश्यकताओं की नवीनतम जानकारी देने के लिये एईआरबी विशेष वार्ता सत्र आयोजित करती है।
विकिरण, रेडियोसक्रिय स्रोतों, उनकी प्रहस्तन व परिवहन गतिविधियों तथा संबंधित नियमों व आवश्यक संरक्षित प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने के लिये एईआरबी सुरक्षा कार्मिकों, हवाई अड्डे के कर्मचारियों, सेना व नौसेना के अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन कार्मकों के लिये विशेष वार्ताओं का आयोजन करता है।
विकिरण आपातकाल के प्रहस्तन की जागरूकता एवं कुशलता के विकास/आकलन के लिये नाभिकीय रिएक्टरों के निकट के जिला अधिकारियों के लिये एईआरबी (परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर) विशेष प्रशिक्षण सत्रों तथा आपाती अभ्यास का आयोजन करता है।
देश में नाभिकीय विज्ञान व इंजीनियरी क्षेत्र में कार्य शुरू करने वाले व्यक्तियों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में नाभिकीय व विकिरण संरक्षा का विषय शामिल है। एईआरबी में कार्य प्रारंभ करने वाले व्यक्तियों को अनुकूलन पाठ्यक्रम में संरक्षा नियमन एवं प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें संबंधित आवश्यकताओं को व्यवहार में लागू करने की विधि भी शामिल है।
एईआरबी द्वारा एक्स-रे मशीनों के अनुमोदन की आवश्यकताओं तथा केवल अनुमोदित मशीनों के प्रयोग की जानकारी देने के लिये एईआरबी द्वारा रेडियो पर प्रसारित करने के लिये अपने जिंगल वाले विज्ञापन बनाये जा रहे हैं। इसके लिये टेलीविज़न के प्रयोग की भी योजना है।
अन्य संबंधित प्रलेख
लेख/वार्ता का विषय
लेखक
रेडियोलाजिकल चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान विकिरण संरक्षण की चुनौतियां
डा. अविनाश यू. सोनावणे, एईआरबी
विकिरण स्रोत
अनुराधा वी., एईआरबी
परमाणु ऊर्जा के प्रति जनता का दृष्टिकोण : भ्रांतियां एवं वास्तविकता
एस.के. मल्होत्रा, परमाणु ऊर्जा विभाग
विजिटर काउण्ट :
3238151
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नियामक भवन अणुशक्तिनगर,,
मुंबई 400094, भारत,
कार्य का समय
9:15 से 17:45 – सोमवार से शुक्रवार
वर्ष के सार्वजनिक अवकाशों की सूची
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नाभिकीय ईंधन चक्र सुविधाएँ
औद्योगिक एवं अनुसंधान एवं विकास गतिविधियाँ
विकिरण सुविधाएँ
उद्योग में आवेदन
विकिरण संसाधन सुविधायें
औद्योगिक रेडियोग्राफी
न्यूक्लियानिक गेज
कूप लागिंग सुविधायें
चिकित्सा में आवेदन
रेडियोथेरेपी
नाभिकीय औषध
नैदानिक रेडियोलाजी
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Medical Cyclotron
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अनुसंधान त्वरक
सीलबंद व खुले रेडियोसक्रिय पदार्थों का प्रयोग करने वाली सुविधायें
गामा किरणन कक्ष
मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं
अंशांकन प्रयोगशालाओं को मान्यता
उपभोक्ता उत्पाद एवं स्कैनिंग सुविधायें
रेडियोएक्टिव पदार्थों का परिवहन
रेडियोएक्टिव अपशिष्ट प्रबंधन
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शांतिपूर्ण व लाभकारी उपयोगों के लिये परमाणु ऊर्जा व विकिरण के संरक्षित उपयोग के बारे में जनता का दृष्टिकोण बदलने के लिये उन्हें सही जानकारी देना आवश्यक है। परमाणु ऊर्जा विभाग, प्रकाशन एवं इलेक्ट्रानिक माध्यमों के लिये ऐसा कार्यक्रम चला रहा है। परंतु देश में नाभिकीय एवं विकिरण सुविधाओं के संरक्षित उपयोग में एईआरबी की भूमिका के बारे में जनता को जानकारी देने के लिये सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा अन्य संस्थाओं के ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने का निर्णय लिया गया है। साथ ही एईआरबी की वेबसाइट पर जनता के लिये यह जानकारी उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है कि जनता व पर्यावरण को बिना कोई हानि पहुंचाने, परमाणु ऊर्जा एवं विकिरण का सुरक्षित प्रयोग कैसे सुनिश्चित किया जाता है।
विकिरण के संरक्षित उपयोगका अर्थ समझने के लिये पहले यह जानना आवश्यक है कि विकिरण क्या है ?
विकिरण क्या है ?
विकिरण गतिशील ऊर्जा है। विकिरण का सरलतम तथा सुपरिचित उदाहरण है – सूर्य अथवा किसी जलते हुए पदार्थ से निकलता प्रकाश। हम सभी यह बात जानते हैं कि जब इस प्रकाश की तीव्रता अधिक (जैसे गर्मी के मौसम में) होती है तो यह हानिकारक हो सकता है। यदि यह एक सीमा से कम हो तो यह संतोषप्रद व अहानिकर होता है। सर्दी के मौसम में जब सूर्य के प्रकाश (विकिरण) की तीव्रता कम होती है तो हम स्वयं को गर्म रखने के लिये आग का प्रयोग करते हैं। अत: विकिरण एक औषधि के समान है जो ठीक मात्रा में लेने पर लाभ की तुलना में कम हानिकारक होती है परंतु अत्यधिक मात्रा में लेने पर मृत्यु का कारण भी बन सकती है।
विकिरण आयन उत्पन्न करने वाला या आयन न उत्पन्न करने वाला हो सकता है। आयनन उत्पन्न करने वाला विकिरण वह है जिसमें परमाणु से इलेक्ट्रान को अलग करने (आयनीकरण) के लिये पर्याप्त ऊर्जा नहीं होती (जैसे रेडियोतरंगे, सूक्ष्म तरंगे (microwaves), अवरक्त विकिरण, दृष्य प्रकाश, लेज़र, पराबैंगनी प्रकाश, रैडार आदि) जबकी आयनकारी विकिरण में परमाणु से इलेक्ट्रान को अलग करने के लिये (आयनीकरण) पर्याप्त ऊर्जा होती है (जैसे अल्फा कण, बीटा कण, न्यूट्रान, गामा किरणें, एक्स-रे किरणों आदि)। विद्युत चुंबकीय विकिरण के लक्षण व प्रकार नीचे के चित्र में दिये गये हैं।
पृष्ठभूमिक विकिरण क्या है तथा विकिरण के अनुप्रयोग से व्यक्ति को कितना विकिरण मिल सकता है ?
हम पृथ्वी की सतह पर रहते हैं तथा व्यवहारिक रूप से विकिरण के समुद्र में हैं। ये विकिरण हमें अंतरिक्ष से (हमारे वायुमंडल से छन कर) या धरती के पदार्थों या भवनों, दीवारों और संरचनाओं से (जिनमें काफी मात्रा में प्राकृतिक रेडियोसक्रिय पदार्थ होते हैं) मिलता है। यदि हम बिना सुरक्षा के हवा में बहुत ऊपर चले जायें तो हमें ब्रह्मांड किरणों के उसी स्रोत से धरती की तुलना में अधिक विकिरण मिलेगा। यदि हम ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां प्राकृतिक रेडियोसक्रिय पदार्थ अधिक मात्रा में है (कुछ तटीय क्षेत्रों में तटीय रेत या खुली खानें) तो हमें अन्य स्थानों की अपेक्षा वहां पर अधिक पृष्ठभूमिक विकिरण मिलेगा। सामान्य पृष्ठभूमिक विकिरण के कारण हमारे शरीर में निक्षेपित ऊर्जा लगभग 2.4 mSv/वर्ष (2400 mSv/वर्ष) [चित्र देखें]। यदि हम इसकी तुलना नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र की अपवर्जन सीमा पर रिएक्टर से 1 – 1.6 किमी दूर) मिलने वाले विकिरण से करें तो यह केवल 0.015 mSv/वर्ष (15 Sv/वर्ष) [चित्र देखें]। यह मात्रा चित्र में दिखाई गयी किसी भी अन्य गतिविधि की तुलना में बहुत कम है। यहां यह बताना उचित होगा कि ----------
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संरक्षा सुनिश्चित करने में एईआरबी की भूमिका ?
रेडियोसक्रिय पदार्थों के प्रयोग तथा ऊर्जा उत्पादन, निदान, चिकित्सा तथा उद्योगों जैसे शांतिपूर्ण उपयोगों वाली सुविधाओं में संरक्षा सुनिश्चित करने के लिये, एईआरबी को लागू संरक्षा नियमों के अनुपालन की कठोर जांच के बाद उनके लायसेंसीकरण एवं नियमन के लिये संपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। संरक्षा नियमन में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विकास के आधार पर नियमों के विकास व संशोधन का उत्तरदायित्व एईआरबी का है।
एईआरबी के अधिकार क्षेत्र में क्या आता है ?
एईआरबी का संबंध नाभिकीय स्रोतों (नाभिकीय रिएक्टरों, स्थल पर भंडारित भुक्तशेष ईंधन, अपशिष्ट निपटान सुविधायें एवं परिवहन सहित अन्य गतिविधियां) से उत्सर्जित आयनकारी विकिरण, विकिरण अनुप्रयोग (रेडियोआइसोटोपों के प्रयोग से संबंधित) तथा एक्स-रे मशीनों से है। अन्य स्रोतों के विकिरण जैसे मोबाइल टावर, पराध्वनिक/सोनोग्राफी मशीने, एमआरआई उपकरण को आयनकारी विकिरण नहीं माना जाता। चूंकि एईआरबी केवल आयनकारी विकिरण के सुरक्षित उपयोग के नियमन के लिये उत्तरदायी है अत: एमआरआई, पराध्वनिक या सोनोग्राफी मशीनें एईआरबी के नियमन के अंतर्गत नहीं आती।
नीचे दिये गये चिकित्सा नैदानिक उपकरण/सुविधायें तथा इनसे संबंधित प्रचालक/कार्मिक एईआरबी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती है :
एक्स-रे उपकरण तथा सुविधायें
कैथ लैब व सीटी स्कैन मशीनें व सुविधायें
सी-आर्म तथा स्तन-चित्रण मशीनें व सुविधायें
संतोषप्रद संरक्षा अनुपालन की जांच के बाद ये मशीनें एईआरबी द्वारा टाईप अनुमोदन के योग्य है। ऐसी टाईप अनुमोदित मशीनों वाली सुविधायें, संतोषप्रद विन्यास संरक्षा तथा प्रचालन संरक्षा की जांच के बाद विन्यास अनुमोदन तथा पंजीकरण/लायसेंसीकरण के योग्य है।
जो कार्मिक इन मशीनों/सुविधाओं का प्रचालन करते हैं उन्हें विकिरण कार्मिक माना जाता है। यद्यपि इन कार्मिकों के काम करने के घंटों/दिनों को निश्चित करने में एईआरबी की कोई भूमिका नहीं है परंतु उन कार्मिकों के लिये निम्न सीमायें निर्धारित की गयी हैं :
5 वर्षों के ब्लाक में कुल संचित डोज़ 100 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
5 वर्षों के ब्लाक के किसी कैलेंडर वर्ष में प्रभावी डोज़ 30 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
किसी भी कैलेंडर वर्ष में आंख के लेंस को प्राप्त समतुल्य डोज़ 150 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
किसी भी कैलेंडर वर्ष में त्वचा, हाथों व पैरों को प्राप्त समतुल्य डोज़ 500 mSv से अधिक नहीं होनी चाहिये।
Iप्रजनन आयु वर्ग की किसी महिला के केस में गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद भ्रूण की रक्षा के लिये महिला के पेट की सतह (धड़ का निचला हिस्सा) पर गर्भावस्था की शेष अवधि के लिये 1 mSv समतुल्य डोज़ सीमा लागू की जानी चाहिये।
नैदानिक रेडियोलाजी विभाग द्वारा एक्स-रे उपकरणों का लायसेंस प्राप्त करने के लिये आवश्यकताओं का विवरण एईआरबी संरक्षा संहिता
“चिकित्सीय नैदानिक एक्स-रे उपकरणों के निर्माण, आपूर्ति एवं प्रयोग में विकिरण संरक्षा [एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-3 (संशोधन- 2), 2016]”
तथा एईआरबी संरक्षा संदर्शिका “विकिरण सुविधाओं की अनुमति प्रक्रिया (एईआरबी/आरएफ/एसजी/जी-3)” में दिया गया है। उपर्युक्त संरक्षा संहिता चिकित्सीय नैदानिक उपयोग के एक्स-रे उपकरणों की डिज़ाइन, निर्माण, स्थापना, प्रचालन तथा विकमीशनन में विकिरण संरक्षा के नियंत्रण के उद्देश्य से जारी की गयी है।
चिकित्सीय नैदानिक उपकरणों/सुविधा से संबंधित नियामक आवश्यकताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिये “बहुधा पूछे जाने वाले पश्न” देखें। इस लेख में विकिरण कार्मिकों के वैयक्तिक मानीटरन, मानीटरन युक्तियों तथा उनके प्रकार व उपलब्धता की जानकारी दी गयी है।
किसी संस्थान/अस्पताल के रेडियोलाजिकल विभाग की नाभिकीय औषध/रेडियोऔषध तथा रेडियोथेरेपी सुविधाओं तथा अनेक कार्मिक भी एईआरबी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। नाभिकीय औषध सुविधाओं के लिये एईआरबी ने नियमन प्रक्रिया (संरक्षा संहितायें व संदर्शिकायें) स्थापित की है जो रेडियोथेरेपी स्रोतों, उपकरणों व संस्थापनों की डिज़ाइन, स्थापना व प्रचालन तथा उससे संबंधित नाभिकीय औषध उपयोग के रेडियोसक्रिय पदार्थों के प्रहस्तन के दिशानिर्देश निर्धारित करती है। रेडियोथेरेपी सुविधाओं के प्रचालन का लायसेंस जारी करने के लिये विशिष्ट आवश्यकतायें भी स्पष्टत: निर्धारित हैं तथा उनका उपयोग अनुपालन की जांच के लिये किया जाता है।
संबंधित योजक :
संरक्षा संहिता “नाभिकीय औषध सुविधायें” एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-2 (संशोधन-2), 2011
संरक्षा संदर्शिका “विकिरण सुविधाओं की अनुमति प्रक्रिया” एईआरबी/आरएफ/एसजी/जी-3
Sसंरक्षा संहिता “विकिरण थेरेपी स्रोत, उपकरण तथा संस्थापन” एईआरबी/आरएफ-एमईडी/एससी-1 (संशोधन-1), 2011
नाभिकीय संरक्षा एवं विकिरण संरक्षा के बारे में जानकारी को जनता तक कैसे प्रेषित किया जाता है ?
नैदानिक व चिकित्सीय विकिरण उपयोगों में कार्यरत डाक्टरों तथा अन्य विकिरण संरक्षा व्यवसायिकों को वर्तमान/संशोधित आवश्यकताओं की नवीनतम जानकारी देने के लिये एईआरबी विशेष वार्ता सत्र आयोजित करती है।
विकिरण, रेडियोसक्रिय स्रोतों, उनकी प्रहस्तन व परिवहन गतिविधियों तथा संबंधित नियमों व आवश्यक संरक्षित प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने के लिये एईआरबी सुरक्षा कार्मिकों, हवाई अड्डे के कर्मचारियों, सेना व नौसेना के अधिकारियों तथा आपदा प्रबंधन कार्मकों के लिये विशेष वार्ताओं का आयोजन करता है।
विकिरण आपातकाल के प्रहस्तन की जागरूकता एवं कुशलता के विकास/आकलन के लिये नाभिकीय रिएक्टरों के निकट के जिला अधिकारियों के लिये एईआरबी (परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर) विशेष प्रशिक्षण सत्रों तथा आपाती अभ्यास का आयोजन करता है।
देश में नाभिकीय विज्ञान व इंजीनियरी क्षेत्र में कार्य शुरू करने वाले व्यक्तियों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में नाभिकीय व विकिरण संरक्षा का विषय शामिल है। एईआरबी में कार्य प्रारंभ करने वाले व्यक्तियों को अनुकूलन पाठ्यक्रम में संरक्षा नियमन एवं प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें संबंधित आवश्यकताओं को व्यवहार में लागू करने की विधि भी शामिल है।
एईआरबी द्वारा एक्स-रे मशीनों के अनुमोदन की आवश्यकताओं तथा केवल अनुमोदित मशीनों के प्रयोग की जानकारी देने के लिये एईआरबी द्वारा रेडियो पर प्रसारित करने के लिये अपने जिंगल वाले विज्ञापन बनाये जा रहे हैं। इसके लिये टेलीविज़न के प्रयोग की भी योजना है।
अन्य संबंधित प्रलेख
लेख/वार्ता का विषय
लेखक
रेडियोलाजिकल चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान विकिरण संरक्षण की चुनौतियां
डा. अविनाश यू. सोनावणे, एईआरबी
विकिरण स्रोत
अनुराधा वी., एईआरबी
परमाणु ऊर्जा के प्रति जनता का दृष्टिकोण : भ्रांतियां एवं वास्तविकता
एस.के. मल्होत्रा, परमाणु ऊर्जा विभाग
विजिटर काउण्ट :
3238151
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