The Central University of Jharkhand
Source: http://www.cuj.ac.in/rajbhasa.php
Archived: 2026-04-23 17:13
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राजभाषा प्रकोष्ठ: संक्षिप्त परिचय
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन एवं प्रशासनिक अनुवाद-कार्य हेतु राजभाषा प्रकोष्ठ का गठन वर्ष 2011 में हुआ था। अब्दुल हलीम विश्वविद्यालय के पहले हिंदी अधिकारी रह चुके हैं। राजभाषा प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय के दैनंदिन कार्यालयी पत्रों/परिपत्रों आदि का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराता है। उक्त प्रकोष्ठ द्वारा विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखा, वित्तीय प्राक्कलन, कोर्ट मीटिंग का एजेंडा एवं अन्य कार्यालयी दस्तावेजों का हिंदी अनुवाद किया जाता है। इसके अलावा, राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा विश्वविद्यालय में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन से संबंधित सभी कार्यों को पूरा किया जाता है। विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और अशैक्षणिक कार्मिकों को अपना कार्यालयी कार्य हिंदी में करने के लिए प्रोत्साहन देने की दृष्टि से कई हिंदी प्रोत्साहन योजनाएं चालू हैं। इन सभी प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत आनेवाले कार्मिकों को पुरस्कार वितरण प्रतिवर्ष हिंदी दिवस समारोह के शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के करकमलों से किया जाता है।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय के कार्मिकों की व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण के लिए समय-समय पर हिंदी प्रशिक्षण, संगोष्ठी, सम्मेलन कार्यशाला आदि का आयोजन किया जाता है। राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा अन्य कार्मिकों के कंप्यूटरों में हिन्दी में कार्य करने/टंकण आदि के बारे में सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) का सदस्य भी है। नराकास की छमाही बैठकों में विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नियमित रूप से भाग लेते हैं। प्रतिवर्ष सितंबर माह में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं हिंदी दिवस समारोह का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है।
इस प्रकार, राजभाषा प्रकोष्ठ का मुख्य लक्ष्य है कि विश्वविद्यालय के कार्यालयी कामकाज में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग हो, यही भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगा। कहने की आवश्यकता नहीं है कि जनसाधारण की भाषा में सरकारी कामकाज करने से विकास की गति तेज होगी और प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। अतएव राजभाषा प्रकोष्ठ हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सदैव तत्पर रहता है। वर्तमान में राजभाषा प्रकोष्ठ में श्री मधुरागी श्रीवास्तव
, हिंदी अधिकारी एवं श्री अजय कुमार, हिंदी टंकक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं।
राजभाषा प्रकोष्ठ: :
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राजभाषा प्रकोष्ठ: संक्षिप्त परिचय
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन एवं प्रशासनिक अनुवाद-कार्य हेतु राजभाषा प्रकोष्ठ का गठन वर्ष 2011 में हुआ था। अब्दुल हलीम विश्वविद्यालय के पहले हिंदी अधिकारी रह चुके हैं। राजभाषा प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय के दैनंदिन कार्यालयी पत्रों/परिपत्रों आदि का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराता है। उक्त प्रकोष्ठ द्वारा विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखा, वित्तीय प्राक्कलन, कोर्ट मीटिंग का एजेंडा एवं अन्य कार्यालयी दस्तावेजों का हिंदी अनुवाद किया जाता है। इसके अलावा, राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा विश्वविद्यालय में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन से संबंधित सभी कार्यों को पूरा किया जाता है। विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और अशैक्षणिक कार्मिकों को अपना कार्यालयी कार्य हिंदी में करने के लिए प्रोत्साहन देने की दृष्टि से कई हिंदी प्रोत्साहन योजनाएं चालू हैं। इन सभी प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत आनेवाले कार्मिकों को पुरस्कार वितरण प्रतिवर्ष हिंदी दिवस समारोह के शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि के करकमलों से किया जाता है।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय के कार्मिकों की व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण के लिए समय-समय पर हिंदी प्रशिक्षण, संगोष्ठी, सम्मेलन कार्यशाला आदि का आयोजन किया जाता है। राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा अन्य कार्मिकों के कंप्यूटरों में हिन्दी में कार्य करने/टंकण आदि के बारे में सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) का सदस्य भी है। नराकास की छमाही बैठकों में विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नियमित रूप से भाग लेते हैं। प्रतिवर्ष सितंबर माह में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं हिंदी दिवस समारोह का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है।
इस प्रकार, राजभाषा प्रकोष्ठ का मुख्य लक्ष्य है कि विश्वविद्यालय के कार्यालयी कामकाज में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग हो, यही भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगा। कहने की आवश्यकता नहीं है कि जनसाधारण की भाषा में सरकारी कामकाज करने से विकास की गति तेज होगी और प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। अतएव राजभाषा प्रकोष्ठ हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सदैव तत्पर रहता है। वर्तमान में राजभाषा प्रकोष्ठ में श्री मधुरागी श्रीवास्तव
, हिंदी अधिकारी एवं श्री अजय कुमार, हिंदी टंकक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं।
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