Synopsis
अंधेरे कुएँ का मेंढक एक प्रसिद्ध चीनी मुहावरा है, जो "ज़ुआंग्ज़ी - शरद ऋतु का पानी" से लिया गया है। यह उन लोगों का वर्णन करता है जिनकी दृष्टि सीमित और संकीर्ण है। यह कहानी एक मेंढक के बारे में है जो एक कुएँ के तल में रहता है और सोचता है कि कुआँ ही पूरी दुनिया है।
मुहावरे का अर्थ
कुएँ का मेंढक (पिनयिन: jǐng dǐ zhī wā), शाब्दिक अर्थ है कुएँ के तल में रहने वाला मेंढक। इसका प्रयोग उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जिसकी दृष्टि संकीर्ण हो और जिसका ज्ञान सीमित हो।
स्रोत
यह "ज़ुआंग्ज़ी - क्यूशुई" से लिया गया है: "कुएँ के मेंढक से समुद्र के बारे में बात नहीं की जा सकती, क्योंकि वह अपनी सीमित जगह से बंधा हुआ है। गर्मी के कीड़े से बर्फ के बारे में बात नहीं की जा सकती, क्योंकि वह अपने समय से बंधा हुआ है।"
कहानी
एक मेंढक एक परित्यक्त उथले कुएँ में रहता था। वह रोज़ कुएँ में इधर-उधर कूदता रहता और बहुत खुश रहता। एक दिन, पूर्वी सागर से एक बड़ा कछुआ उस कुएँ के पास से गुज़रा। मेंढक ने घमंड से कछुए से कहा: "देखो मैं कितना खुश हूँ! कुएँ में तैरता हूँ, कुएँ के किनारे धूप सेंकता हूँ। तुम अंदर क्यों नहीं आते देखने?" कछुआ अंदर जाना चाहता था, लेकिन उसका बायाँ पैर अंदर डालते ही दायाँ पैर अटक गया। इसलिए कछुआ वापस हट गया और मेंढक से कहा: "समुद्र हज़ार मील तक फैला हुआ है, उसकी गहराई अथाह है। महान यु के समय में दस साल में नौ बार बाढ़ आई, फिर भी समुद्र का पानी नहीं बढ़ा। राजा तांग के समय में आठ साल में सात बार सूखा पड़ा, फिर भी समुद्र का तट संकरा नहीं हुआ। इतने उथले कुएँ में रहकर, तुम दुनिया की विशालता को कैसे जान सकते हो?" मेंढक यह सुनकर स्तब्ध रह गया।
मूल जानकारी
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पिनयिन | jǐng dǐ zhī wā |
| स्रोत | "ज़ुआंग्ज़ी - क्यूशुई" |
| काल | युद्धरत राज्यों का काल (लगभग 300 ईसा पूर्व) |
| अर्थ | दृष्टि संकीर्ण, ज्ञान सीमित |
| समानार्थी | कुएँ में बैठकर आकाश देखना, बाँस के टुकड़े से समुद्र नापना |
संदर्भ सामग्री
- "ज़ुआंग्ज़ी - क्यूशुई"
- "चीनी मुहावरों का बृहत् शब्दकोश"
Comments (0)