Synopsis
तांग राजवंश के कवि दू फू की प्रसिद्ध रचना "ऊंचाई पर चढ़ना" को सात-शब्द वाली कविता का शीर्ष माना जाता है। यह कविता तांग राजवंश के सम्राट दाईली के दूसरे वर्ष (767 ईस्वी) के पतझड़ में लिखी गई थी, जब दू फू कुइज़ौ में ऊंचाई पर चढ़कर दूर तक देख रहे थे और भावनाओं से भर उठे थे।
अवलोकन
"ऊँचाई पर चढ़ना" तांग राजवंश के महान कवि दू फू की प्रतिनिधि रचनाओं में से एक है, जिसकी रचना दाली दूसरे वर्ष (767 ईस्वी) के शरद ऋतु में हुई थी। उस समय दू फू की आयु 56 वर्ष थी, वे कुइज़ौ (आधुनिक चोंगकिंग फेंगजी) में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे, जीवन कठिनाइयों से भरा था और शरीर दुर्बल हो चुका था। इस कविता को सात-अक्षरीय लू शी (कविता) में शीर्ष स्थान प्राप्त है। अपनी शक्तिशाली, विशाल और उदास दृश्यावली तथा गहन जीवन के प्रति अनुभूति के कारण, यह चीनी शास्त्रीय काव्य का शिखर बन गई है।
मूल पाठ
हवा तेज़, आकाश ऊँचा, बंदरों का रुदन दुखदायी,
द्वीप स्वच्छ, रेत सफेद, पक्षी वापस उड़ते आते।
अनंत पेड़ों के पत्ते सरसराते हुए गिरते,
अथाह यांग्त्ज़ी नदी की लहरें गरजती हुई आतीं।
हज़ारों मील का सफर, शरद में विदेशी यात्री का दुख,
सौ वर्षों की बीमारी, अकेले मंच पर चढ़ता हूँ।
कठिनाइयों, कड़वाहटों ने मेरे मंदिरों को सफ़ेद कर दिया,
अपनी दुर्दशा में, मैंने हाल ही में मदिरा पाना बंद कर दिया है।
विश्लेषण
प्रथम दो पंक्तियाँ ऊँचाई से दिखने वाले दृश्यों का वर्णन करती हैं: तेज़ शरद ऋतु की हवा, ऊँचा और साफ आकाश, बंदरों का दुखभरा रुदन, स्वच्छ पानी और सफेद रेत, पक्षियों का चक्कर लगाना। अगली दो पंक्तियाँ गिरते पत्तों की सरसराहट और यांग्त्ज़ी नदी की गरजती लहरों के माध्यम से शरद ऋतु की शक्ति का वर्णन करती हैं, जो न केवल दृश्य वर्णन है बल्कि समय के बीतने और जीवन की क्षणभंगुरता पर एक विषादपूर्ण टिप्पणी भी है। अगली दो पंक्तियाँ कवि की स्वयं की स्थिति की ओर मुड़ती हैं: हज़ारों मील का भटकाव, लंबे समय तक परदेश में रहना, बुढ़ापे में बीमारी, और अकेले ऊँचाई पर चढ़ना। अंतिम दो पंक्तियाँ पूरी कविता का सार प्रस्तुत करती हैं: कठिन समय और जीवन की पीड़ा ने उनके मंदिरों को सफ़ेद कर दिया है; गरीबी और दुर्दशा में, दुख भुलाने के लिए शराब पीना भी हाल ही में बंद करना पड़ा है।
लेखक परिचय
| आइटम | विवरण |
|---|---|
| नाम | दू फू (712-770) |
| उपनाम | ज़ी मेई, उपाधि: शाओलिंग ये लाओ (शाओलिंग का बूढ़ा आदमी) |
| राजवंश | तांग राजवंश |
| उपाधि | कविताओं का संत (शी शेंग) |
| प्रतिनिधि कार्य | "वसंत का दृश्य", "झोंपड़ी जिसे शरद की हवा ने तोड़ दिया", "ऊँचाई पर चढ़ना" |
सांस्कृतिक प्रभाव
"ऊँचाई पर चढ़ना" को दू फू के जीवन के अंतिम चरण की काव्य कला की सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक माना जाता है। मिंग राजवंश के हू यिंगलिन ने इस कविता को सात-अक्षरीय लू शी में प्रथम स्थान दिया है। यह कविता कई शास्त्रीय कविता संग्रहों में शामिल है और तांग कविता सीखने के लिए एक अनिवार्य पाठ है।
संदर्भ सामग्री
- "क्वान तांग शी" खंड 230
- शियाओ दीफ़ेई, "दू फू शी ज़ुआन झू"
- मो लीफेंग, "दू फू शीगे डी यीशू तेसे"
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